हर तरफ तश्नगी, हर तरफ बेबसी।
ऐसा लगता है, हो एक ख़ता ज़िंदगी।।
कहानियों में दर्ज एहसास कभी-कभी इतने गहरे होते हैं कि उन्हें पढ़ने के बाद फिर कुछ कहना-सुनना शेष नहीं रह जाता।
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