देर रात पहुंची हमारी ट्रेन और फिर काली-पीली टैक्सी (जी हां यहां टैक्सी को इसी नाम से बुलाते हैं,) से सॉल्ट लेक का सफर आधे घंटे में ही तय हो गया। अगली सुबह बेहद खूबसूरत थी। बादलों के बीच से धूप जैसे झांक रही हो। तो इस तरह से दिन की शुरूआत हुई और दिन ढलते-ढलते बरखा रानी जमकर बरसीं। हमनें भी खूब मजे किये क्योंकि अभी तक तो सुना था कि बादल कहीं बरसे न बरसे लेकिन कोलकाता में अगस्त के महीने में जमकर बारिश होती है। तो हम इस खूबसूरत मौसम से क्यूं बचते? तो हो लिए बारिश के संग और पहुंच गए कॉफी पीने। शानदार कैपेचीनों का लुत्फ उठाने के बाद जैसे ही बारिश हल्की हुई, पहुंच गए पुचका खाने। जानते हैं पुचका क्या है? अरे भाई हमारे यूपी का हर दिल अजीज और लखनऊ में तो अलग-अलग पानियों यानि कि खट्टा-मीठा, हींग वाला, नींबू वाला, दही वाला और न जाने क्या-क्या। सही समझे आप गोलगप्पे। यकीन मानिए यहां के पानी पूरी का नाम ही नहीं बदला बल्कि टेस्ट में भी लाजवाब हैं। हालांकि ये अलग बात है कि पुचका खिलाने वाले भइया जी यूपी के ही इलाहाबाद शहर से रोजी-रोटी की तलाश में कोलकाता पहुंच गए। बातों ही बातों में उन्होंने यह भी साझा किया कि पुचका का अलग अंदाज उन्होंने कोलकाता में सीखा लेकिन उसमें यूपी का तीखा वाला तड़का वो जरूर लगाते हैं और फिर जब आखिरी पुचका खिलाते हैं तो उसमें ढेर सारी मटर के साथ पुदीने और कच्चे आम की चटनी का स्वाद डाल देते हैं, जिससे पुचका और भी लजीज हो जाता है। आपको बता दें कि यहां यूपी वाले पुचका की फें्रचाइजी भी है। हालांकि अभी छोटे स्तर पर ही है, लेकिन डिमांड को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि जल्दी ही यूपी वाले पुचका की बड़ी-बड़ी दुकानें होंगी। ऐसे में जब हमनें उन्हें खुद के यूपी से होने का बताया और उनके पुचका की तस्वीर लेनी चाही तो वे खुद भी तस्वीर के खांके में शामिल होने लगे। फिर हमनें भी पुचका के साथ यूपी वाले भइया की तस्वीर ले डाली। तो ये तो था पुचका के साथ पहला दिन। आगे बहुत सारी प्लॉनिंग है, देखते हैं क्या-क्या मिलता है सिटी ऑफ जॉय के सफर में......

👌👌👌👌👌👌👏👏
ReplyDelete🙇
DeleteWaah
ReplyDeleteShukriya
DeleteWaah shaandaar🤣🤣
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