Sunday, November 27, 2016
तो कह दो वो सारी अनकही बातें,,,
कुछ अनकही बातें हैं मेरे और तुम्हारे दरम्यान। आज साथ बैठे हो, तो कह दो वो सारी अनकही बातें,,,
ना मालूम फिर साथ हो न हो, फिर मेरी-तुम्हारी मुलाकात हो न हो।
आज साथ बैठे हो, तो कह दो वो सारे अनकहे किस्से, जिन्हें मैंने, हां मैंने तुम्हारी निगाहों में पढा था।
खोल दो अपने दिल में छिपे हर राज के पन्नें, जिनपर तुमने लिखा तो बहुत कुछ पर आज तक कुछ कह न पाए। जाने वो कौन सा था अहसास, जिसे तुमने मेरे लिए महसूस किया और मैंने तुम्हारी आंखों में पढ़ा। कह दो, कह दो न आज वो सारी अनकही बातें।
जानती हूं तुम आज भी हमेशा की तरह, बस मुझे यूं ही देखते रहोगे फिर मेरे कुछ कहने पर कुछ फसाने यूं ही छेड़ोगो। जिनपर मैं मुस्कुराउंगी और तुम मुझे देखते रहोगो। फिर मैं कुछ पूछूंगी और फिर तुम जवाब मुस्कुराकर टाल दोगे। सच कहूं तो जानती हूं कि मेरे और तुम्हारे दरम्यान जो अनकहा है। उसे मुझे यूं ही समझना होगा क्योंकि फिर न तुम कुछ कहोगे और न मैं कुछ समझूंगी। लेकिन क्या यह अनकही बातों का दौर थम सकेगा। क्या तुम अपने दि में उठते जज्बातों को रोक सकोगे। जो कभी तुम्हारी आंखों में नजर आते हैं तो कभी तुम्हारी बातों में। इन अधूरी बातों को आखिर कह क्यूं नहीं देते तुम। क्यूं तुम इस अनकहे रिश्ते को, इन अनकहे जज्बातों को कोई नाम नहीं दे देते।
सुनो आखिर बार कह रहीं हूं, क्योंकि जानती हूं ये मुलाकात आखिरी है फिर न जाने कब किसी मोड़ पर तुम्हारी मेरी मुलाकात या बात हो न हो। पर जाते-जाते मैं मेरे हिस्से की अनकही बातें आज तुमसे कह देना चाहती हूं। सोचती हूं कि तुम कहो न कहो मैं कह जाती हूं। कि तुम होते हो तो ये चांद-सितारे मेरी जिंदगी भी रोशन कर जाते हैं। तुम होते हो तो ये वादियां मेरी अपनी लगने लगती हैं। या यूं कहूं कि तुम होते हो जिंदगी जिंदगी लगने लगती है। मेरा अनकहा तुम्हारे लिए बस इतना था, लेकिन जो मैं कहने पर आऊं तो सदियां कम लगने लगेंगी। लेकिन सोचती हूं कि मेरी अनकही बातों का दौर यहीं थमना चाहिए और कुछ अनकही बातों, ख्यालों और अहसासों को अपनी रूह में जज्ब करना होगा क्योंकि उन्हें कहना नहीं है मुझे, तुम्हे महसूस करना होगा।
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