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तुम्हें फूलों से बहुत प्यार है न,
तभी तो वह नन्हा सा पौधा लेकर आये थे तुम।
तमाम सारे पौधों के बावजूद, सफेद कनेर का फूल।
ना जाने क्यूं तुम्हें अपनी ओर खींचता था वह।
देखो,आज वह नन्हा सा पौधा पेड़ बन चुका है
और किसी एक डाली पर नहीं बल्कि पूरा पेड़ फूलों से लदा है।।
फूल कुछ यूँ बिखरें हैं कि इन्हें देखते ही तुम्हारी मनमोहक मुस्कान याद आ जाती है।
वो इसे रोपते हुए तुम्हारी आँखों की चमक याद आ जाती है।
कैसे तुमने इसे बेहद प्यार से रोपा फिर पानी की जगह दूध से सींचा।।
यूँ जैसे उसे जीवन देने की पहली खुराक थी वो।
इसके बाद हर रोज़ उसके साथ तुम्हारा बात करना।।
उससे ही उसका हालचाल लेना
यह पूछना कि कैसा है वह?
और बिखरी पत्तियों को देखकर तुम्हारा भी उदास हो जाना.....
लेकिन अगले ही पल पौधे की नई शाख को देखकर तुम मुस्कुरा उठते...इस उम्मीद में कि उसका परिवार बढ़ने लगा है।
एक पौधे में नई शाखा के जन्मनें का सुख तुम्हारे चेहरे पर देखते ही बनता...
आज महीनों बाद यह कनेर का पौधा पूरी तरह से पेड़ बन चुका है।।
इसकी शाखाएं चारों तरफ फैली हैं...
और बिखरें हैं सफ़ेद रंग के फूल, जो आने-जाने वाले हर व्यक्ति का ध्यान अपनी तरफ खींचते हैं...
लेकिन फिर कभी यह उदास होने लगता है,
शायद इसे भी अब तुम्हारी कमी खलती है...
शायद इसे जीवन संचार करने वाले को देखने की आस है शायद......
शानदार
ReplyDeleteशुक्रिया सर।
ReplyDeleteBahut sunder and meaningful.
ReplyDeletethanks sir
Deleteबहुत खूबसूरत, मन को भा गया कनेर का फूल।
ReplyDeleteधन्यवाद सर।
Deleteकम शब्दो मे काफी कुछ कह दिया। बहुत खूब।
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteकम शब्दो मे काफी कुछ कह दिया। बहुत खूब।
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