Friday, November 5, 2021

फरेब... तुम्‍हें खोने का डर जरा सा

 

तुम मेरा प्रेम नहीं हो लेकिन तुमसे मेरा नेह का नाता था। तुम्‍हें याद भर करने से तुमसे बात हो जाती थी। उसका नाम जपते-जपते उम्र गुजरने को है लेकिन वो सच्‍चे इश्‍क वाली कसक आज भी द‍िल में है। मेरे बेहद सीधे-साधे द‍िल के साथ उसकी द‍िमाग वाली केमिस्‍ट्री निभ नहीं पाई। हां लेकिन मेरे दिल ने तब तक उफ्फ नहीं की जब तक क‍ि अपनी आह की धड़कने मेरे द‍िमाग तक पहुंचने से रोक सकता था। तुम सोच रहे होगे क‍ि एक बदद‍िमाग लड़की ऐसी बातें कैसे कर सकती है। है न..... बिल्‍कुल सही बात है ये... लेकिन जानते हो कि तुम्‍हारी फोन वाली शोहबत में द‍िल-द‍िमाग का फर्क तो मैं अच्‍छे से समझ गई थी। बात कुछ थी....  तो बस इतनी कि मैं अपने द‍िल के टूटने से शायद डरती थी। ऐसे तो मुझे यानी कि व‍िध‍ि को कभी 800 मीटर के ट्रैक पर दौड़ने से भी डर नहीं लगा। लेकिन तुम्‍हें खोने का डर जरा सा.... हां ठीक समझ रहे हो, था तो वह जरा सा ही.... लेकिन कुछ आकाश जैसा अनंत और सागर जितना गहरा। जिसका अंश- अंश मैं महसूस कर सकती थी। जिसकी बूंद-बूंद में मैं हर लम्‍हें भीगती थी। बरसों का साथ था अपना लेक‍िन याद के नाम पर हमारी.... नहीं ... नहीं .... केवल तुम्‍हारी मुलाकात की वो शाम ही थी मेरे पास... उससे स‍िवा कुछ था तो बस प्रेम की चाशनी में लिपटा तुम्‍हारा फरेब...


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