Friday, April 13, 2018

डायरी के पन्नों से: एक बार फिर 'तुम' हो


मेरी आज की कविता एक बार फिर तुम हो,
हर शब्द का आगाज और अंजाम तुम हो।।
तुम हो न हो एहसास रहता है,
कि मेरे दिल की धड़कनों में तुम्हारा साज बजता है।।

बस एक बार ये बात तुम भी कह दो,
मेरे दिल की इस बात को अंजाम तुम दे दो।।
फिर तुम चले भी जाओगे तो इल्जाम न दूंगीं,
बस एक बार तुम मेरे हो, इसका एहसास तुम दे दो।।
कि मेरी आज की कविता एक बार फिर तुम हो....................
एक बार फिर तुम हो........................

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